





About Maa Baglamukhi
सर्व सिद्ध पीठ मां बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा मध्यप्रदेश एक ऐसा स्थान है जहां मां बगलामुखी त्रिशक्ति के रुप में विराजमान है | मां बगलामुखी को ब्रह्मास्त्र महाविद्या कहा जाता है |
मां बगलामुखी अनुष्ठान एवम् हवन से...
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शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है,
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रोग बाधा से मुक्ति, लक्ष्मी की प्राप्ति,
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दांपत्य में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं,
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राजनिति में सफ़लता दिग्विजय प्राप्त होती है,
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न्यायालय में विजय प्राप्त होती है,
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दसों दिशाओं से रक्षा प्राप्त होती है,
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व्यापार मे वृद्धि होती है,
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मनुष्य जीवन में आ रही सभी बाधाएं समाप्त होती है और सुख शांति समृद्धि प्राप्त होती है और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है |
सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती.[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?] शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से शत्रुओं का स्तम्भन होता है तथा जातक का जीवन निष्कंटक हो जाता है।[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?] किसी छोटे कार्य के लिए १०००० तथा असाध्य से लगाने वाले कार्य के लिए एक लाख मंत्र का जाप करना चाहिए। बगलामुखी मंत्र के जाप से पूर्व बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। स्वरुप : नवयौवना हैं और पीले रंग की साङी धारण करती हैं । सोने के सिंहासन पर विराजती हैं । तीन नेत्र और चार हाथ हैं । सिर पर सोने का मुकुट है । स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत हैं । शरीर पतला और सुंदर है । रंग गोरा और स्वर्ण जैसी कांति है । सुमुखी हैं । मुख मंडल अत्यंत सुंदर है जिस पर मुस्कान छाई रहती है जो मन को मोह लेता है |
माता बगलामुखी का यह मंदिर मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा कस्बे में लखुन्दर नदी के किनारे स्थित है। यह मन्दिर तीन मुखों वाली त्रिशक्ति बगलामुखी देवी को समर्पित है। मान्यता है कि द्वापर युग से चला आ रहा यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक भी है। इस मन्दिर में विभिन्न राज्यों से तथा स्थानीय लोग भी एवं शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव तथा सरस्वती की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
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कहते हैं कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत में विजय के उद्देश्य से
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भगवान कृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने की थी।
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मान्यता यह भी है कि यहाँ की बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू है।
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प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख है जिनमें से एक है बगलामुखी। माँ भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है। विश्व में इनके सिर्फ तीन ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। यह मन्दिर उन्हीं से एक बताया जाता है |
बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा